श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.85.13 
स एष किल सैन्येन प्राप्त: किल निकुम्भिलाम्।
यद्युत्तिष्ठेत् कृतं कर्म हतान् सर्वांश्च विद्धि न:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वह अवश्य ही अपनी सेना सहित निकुंभिला गया है। यदि वह हवन करके चला जाए, तो हम सब उसके हाथों मारे हुए समझो॥13॥
 
‘He has surely gone to Nikumbhila with his army. If he leaves after finishing his havan rituals, then consider us all dead at his hands.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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