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ramayan 6.85.11-12h: युद्ध में विजयी महाधनुर्धर लक्ष्मण अपने मण्डलाकार धनुष से छोड़े गए विषैले सर्पों के समान घातक बाणों द्वारा रावण के पुत्र को मारने में समर्थ हैं। 11 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  6.85.11-12h 
धनुर्मण्डलनिर्मुक्तैराशीविषविषोपमै:॥ ११॥
शरैर्हन्तुं महेष्वासो रावणिं समितिंजय:।
 
 
अनुवाद
युद्ध में विजयी महाधनुर्धर लक्ष्मण अपने मण्डलाकार धनुष से छोड़े गए विषैले सर्पों के समान घातक बाणों द्वारा रावण के पुत्र को मारने में समर्थ हैं। 11 1/2॥
 
The war-winning great archer Lakshmana is capable of killing Ravana's son with arrows as deadly as poisonous snakes fired by his mandala-shaped bow. 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)