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ramayan 6.85.1: भगवान् राम दुःख से पीड़ित थे, इसलिए राक्षस विभीषण की बात सुनकर भी वे उसे स्पष्ट रूप से समझ नहीं सके--उस पर पूरा ध्यान नहीं दे सके ॥1॥   |   ramayan सर्ग 6.85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.85.1 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा राघव: शोककर्शित:।
नोपधारयते व्यक्तं यदुक्तं तेन रक्षसा॥ १॥
 
 
अनुवाद
भगवान् राम दुःख से पीड़ित थे, इसलिए राक्षस विभीषण की बात सुनकर भी वे उसे स्पष्ट रूप से समझ नहीं सके--उस पर पूरा ध्यान नहीं दे सके ॥1॥
 
Lord Rama was suffering from grief, so even after listening to what the demon Vibhishana said, he could not understand it clearly – he could not pay full attention to it. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)