vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना
»
श्लोक 9
श्लोक
6.84.9
मनुजेन्द्रार्तरूपेण यदुक्तस्त्वं हनूमता।
तदयुक्तमहं मन्ये सागरस्येव शोषणम्॥ ९॥
अनुवाद
महाराज! हनुमानजी ने दुःखी स्वर में जो समाचार आपको सुनाया है, उसे मैं समुद्र को सोख लेने के समान असम्भव समझता हूँ॥9॥
Maharaj! I consider the news that Hanumanji has conveyed to you in a sad tone, as impossible as sucking up the ocean.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×