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ramayan 6.84.8: जब लक्ष्मण ऐसा कह रहे थे, तब विभीषण ने उन्हें रोककर अचेत पड़े हुए श्री रामचन्द्रजी से यह निश्चित बात कही-॥8॥   |   ramayan सर्ग 6.84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.84.8 
कथयन्तं तु सौमित्रिं संनिवार्य विभीषण:।
पुष्कलार्थमिदं वाक्यं विसंज्ञं राममब्रवीत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब लक्ष्मण ऐसा कह रहे थे, तब विभीषण ने उन्हें रोककर अचेत पड़े हुए श्री रामचन्द्रजी से यह निश्चित बात कही-॥8॥
 
While Lakshman was saying this, Vibhishana stopped him and told this definite thing to Shri Ramchandra who was lying unconscious -॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)