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ramayan 6.84.7: हे सज्जन! हनुमान जी से यह सुनकर कि 'इन्द्रजित ने सीता जी का हरण कर लिया है' श्री रघुनाथ जी तुरन्त ही अचेत हो गए॥7॥   |   ramayan सर्ग 6.84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.84.7 
हता इन्द्रजिता सीता इति श्रुत्वैव राघव:।
हनूमद्वचनात् सौम्य ततो मोहमुपाश्रित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे सज्जन! हनुमान जी से यह सुनकर कि 'इन्द्रजित ने सीता जी का हरण कर लिया है' श्री रघुनाथ जी तुरन्त ही अचेत हो गए॥7॥
 
Gentle! Hearing from Hanuman ji that 'Indrajit has killed Sita ji', Shri Raghunath ji immediately became unconscious. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)