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ramayan 6.84.20: लक्ष्मण के तीखे बाण, जो पक्षियों के पंखों में लगे होने के कारण बहुत वेगवान हैं, कंक आदि क्रूर पक्षियों की भाँति इन्द्रजित का रक्त पी जाएँगे॥ 20॥   |   ramayan सर्ग 6.84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.84.20 
तस्यैते निशितास्तीक्ष्णा: पत्रिपत्राङ्गवाजिन:।
पतत्त्रिण इवासौम्या: शरा: पास्यन्ति शोणितम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के तीखे बाण, जो पक्षियों के पंखों में लगे होने के कारण बहुत वेगवान हैं, कंक आदि क्रूर पक्षियों की भाँति इन्द्रजित का रक्त पी जाएँगे॥ 20॥
 
Lakshmana's sharp arrows which are very fast due to being attached to the feathers of birds, will drink the blood of Indrajit like the ferocious birds like Kanka etc.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)