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ramayan 6.84.15-16h: 'उसने अवश्य ही हमें मूर्ख बनाने के लिए यह माया रची है। उसने सोचा होगा कि यदि वानरों का पराक्रम जारी रहा, तो मेरा कार्य बाधित हो जाएगा (इसीलिए उसने ऐसा किया है)॥15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  6.84.15-16h 
तेन मोहयता नूनमेषा माया प्रयोजिता॥ १५॥
विघ्नमन्विच्छता तत्र वानराणां पराक्रमे।
 
 
अनुवाद
'उसने अवश्य ही हमें मूर्ख बनाने के लिए यह माया रची है। उसने सोचा होगा कि यदि वानरों का पराक्रम जारी रहा, तो मेरा कार्य बाधित हो जाएगा (इसीलिए उसने ऐसा किया है)॥15 1/2॥
 
‘He has surely used this illusion to fool us. He must have thought that if the monkeys' prowess continues, then my task will be obstructed (that is why he has done this).॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)