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ramayan 6.84.13: महाबाहो! राक्षस इन्द्रजित वानरों को मोहित करके चला गया है। उसने जिसे मारा है, वह मायावी जानकी है, यह तुम निश्चयपूर्वक जान लो ॥13॥   |   ramayan सर्ग 6.84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.84.13 
वानरान् मोहयित्वा तु प्रतियात: स राक्षस:।
मायामयीं महाबाहो तां विद्धि जनकात्मजाम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! राक्षस इन्द्रजित वानरों को मोहित करके चला गया है। उसने जिसे मारा है, वह मायावी जानकी है, यह तुम निश्चयपूर्वक जान लो ॥13॥
 
Mahabaho! The demon Indrajit has gone away after bewitching the monkeys. The one he killed was the illusory Janaki, you can be sure of this. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)