Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.84.12: ‘कोई भी मनुष्य रिश्वत, रिश्वत और छल-कपट के द्वारा भी सीता को नहीं देख सकता; फिर युद्ध के द्वारा वह उसे कैसे देख सकता है?॥12॥   |   ramayan सर्ग 6.84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.84.12 
नैव साम्ना न दानेन न भेदेन कुतो युधा।
सा द्रष्टुमपि शक्येत नैव चान्येन केनचित्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘कोई भी मनुष्य रिश्वत, रिश्वत और छल-कपट के द्वारा भी सीता को नहीं देख सकता; फिर युद्ध के द्वारा वह उसे कैसे देख सकता है?॥12॥
 
‘No man can see Sita even through the use of bribery, bribery and deception; then how can he see her through war?॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)