श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.84.11 
याच्यमान: सुबहुशो मया हितचिकीर्षुणा।
वैदेहीमुत्सृजस्वेति न च तत् कृतवान् वच:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उसका कल्याण करने की इच्छा से मैंने उससे बहुत बार विनती की कि वह विदेहकुमारी को छोड़ दे, परन्तु उसने मेरी बात नहीं मानी॥11॥
 
With the desire to do him good, I requested him many times to release Videha Kumari, but he did not listen to me.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)