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ramayan 6.84.10: महाबाहो! मैं जानता हूँ कि दुष्ट रावण सीता के प्रति क्या भावना रखता है। वह उसे कभी नहीं मरने देगा।॥10॥   |   ramayan सर्ग 6.84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.84.10 
अभिप्रायं तु जानामि रावणस्य दुरात्मन:।
सीतां प्रति महाबाहो न च घातं करिष्यति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! मैं जानता हूँ कि दुष्ट रावण सीता के प्रति क्या भावना रखता है। वह उसे कभी नहीं मरने देगा।॥10॥
 
‘Mahabaho! I know very well what the evil-minded Ravana feels for Sita. He will never let her be killed.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)