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ramayan 6.82.7: उन महाप्रतापी वानरों से चारों ओर से घिरे हुए हनुमान्‌जी ने शत्रु सेना को ज्वालाओं की मालाओं से प्रज्वलित अग्नि के समान जलाना आरम्भ कर दिया॥7॥   |   ramayan सर्ग 6.82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.82.7 
स तैर्वानरमुख्यैस्तु हनूमान् सर्वतो वृत:।
हुताशन इवार्चिष्मानदहच्छत्रुवाहिनीम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उन महाप्रतापी वानरों से चारों ओर से घिरे हुए हनुमान्‌जी ने शत्रु सेना को ज्वालाओं की मालाओं से प्रज्वलित अग्नि के समान जलाना आरम्भ कर दिया॥7॥
 
Hanumanji, surrounded on all sides by those great monkeys, started burning the enemy army like a blazing fire with garlands of flame. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)