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ramayan 6.82.4: मैं युद्ध में आगे चलूँगा। तुम सब मेरे पीछे चलो। कुलीन कुल में जन्मे वीर पुरुषों का युद्ध में पीठ दिखाना सर्वथा अनुचित है।॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.82.4 
पृष्ठतोऽनुव्रजध्वं मामग्रतो यान्तमाहवे।
शूरैरभिजनोपेतैरयुक्तं हि निवर्तितुम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मैं युद्ध में आगे चलूँगा। तुम सब मेरे पीछे चलो। कुलीन कुल में जन्मे वीर पुरुषों का युद्ध में पीठ दिखाना सर्वथा अनुचित है।॥4॥
 
I will march ahead in the battle. All of you follow me. It is completely improper for brave men born in noble families to show their backs in battle.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)