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ramayan 6.82.3: 'वानरों! तुम युद्ध का उत्साह त्यागकर, उदास होकर क्यों भाग रहे हो? तुम्हारा पराक्रम कहाँ चला गया?॥3॥   |   ramayan सर्ग 6.82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.82.3 
कस्माद् विषण्णवदना विद्रवध्वं प्लवंगमा:।
त्यक्तयुद्धसमुत्साहा: शूरत्वं क्व नु वो गतम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'वानरों! तुम युद्ध का उत्साह त्यागकर, उदास होकर क्यों भाग रहे हो? तुम्हारा पराक्रम कहाँ चला गया?॥3॥
 
‘Monkeys! Why are you running away with gloom on your faces, abandoning your enthusiasm for war? Where has your valour gone?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)