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श्लोक 6.82.22-23h  |
इममर्थं हि विज्ञाप्य रामं सुग्रीवमेव च॥ २२॥
तौ यत् प्रतिविधास्येते तत् करिष्यामहे वयम्। |
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| अनुवाद |
| अब हमें भगवान राम और सुग्रीव को यह बात बता देनी चाहिए। फिर वे जो भी प्रतिशोध करने का विचार करेंगे, हम वैसा ही करेंगे।॥22 1/2॥ |
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| ‘Now we should inform Lord Rama and Sugriv about this. Then whatever retaliation they think of, we will do the same.'॥ 22 1/2॥ |
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