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श्लोक  6.82.21-22h 
त्यक्त्वा प्राणान् विचेष्टन्तो रामप्रियचिकीर्षव:॥ २१॥
यन्निमित्तं हि युध्यामो हता सा जनकात्मजा।
 
 
अनुवाद
जनक की पुत्री सीता, जिसके लिए हमने भगवान राम को प्रसन्न करना चाहा था और जिसके लिए हमने पूरी शक्ति से युद्ध किया था, अपने प्राणों का बलिदान दिया था, वह मारी गयी।
 
Sita, the daughter of Janak, for whom we desired to please Lord Rama, and fought with all our might, sacrificing our lives, was killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)