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ramayan 6.82.20-21h: इस प्रकार शत्रु सेना के आक्रमण को रोककर हनुमान ने वानरों से कहा, "भाइयों! अब लौट जाओ, अब हमें इस सेना को नष्ट करने की कोई आवश्यकता नहीं है।   |   ramayan सर्ग 6.82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  6.82.20-21h 
संनिवार्य परानीकमब्रवीत् तान् वनौकस:॥ २०॥
हनूमान् संनिवर्तध्वं न न: साध्यमिदं बलम्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शत्रु सेना के आक्रमण को रोककर हनुमान ने वानरों से कहा, "भाइयों! अब लौट जाओ, अब हमें इस सेना को नष्ट करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
 
Having thus stopped the onslaught of the enemy army, Hanuman said to the monkeys, "Brothers! Now return, there is no need for us to destroy this army now.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)