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ramayan 6.82.2: उन सबको दुःखी, व्यथित और भयभीत होकर भागते हुए देखकर पवनपुत्र हनुमान्‌जी ने कहा-॥2॥   |   ramayan सर्ग 6.82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.82.2 
तानुवाच तत: सर्वान् हनूमान् मारुतात्मज:।
विषण्णवदनान् दीनांस्त्रस्तान् विद्रवत: पृथक्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन सबको दुःखी, व्यथित और भयभीत होकर भागते हुए देखकर पवनपुत्र हनुमान्‌जी ने कहा-॥2॥
 
Seeing them all running away, sad, distressed and frightened, Hanuman, the son of the wind, said -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)