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ramayan 6.82.12: जब वह चट्टान गिरी, तो राक्षस सेना को बहुत पीड़ा हुई। उस गिरती चट्टान ने कई राक्षसों को कुचल दिया।   |   ramayan सर्ग 6.82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.82.12 
पतितायां शिलायां तु व्यथिता रक्षसां चमू:।
निपतन्त्या च शिलया राक्षसा मथिता भृशम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जब वह चट्टान गिरी, तो राक्षस सेना को बहुत पीड़ा हुई। उस गिरती चट्टान ने कई राक्षसों को कुचल दिया।
 
When that rock fell, the demon army felt great pain. The falling rock crushed many demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)