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ramayan 6.82.1: इन्द्र के वज्र के समान भयंकर गर्जना सुनकर वानर बड़ी तेजी से सब ओर देखते हुए भागने लगे॥1॥   |   ramayan सर्ग 6.82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.82.1 
श्रुत्वा तु भीमनिर्ह्रादं शक्राशनिसमस्वनम्।
वीक्ष्यमाणा दिश: सर्वा दुद्रुवुर्वानरा भृशम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र के वज्र के समान भयंकर गर्जना सुनकर वानर बड़ी तेजी से सब ओर देखते हुए भागने लगे॥1॥
 
Hearing that terrifying roar, which was like the rumbling of Indra's thunderbolt, the monkeys began to run away at a great speed, looking in all directions. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)