श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 81: इन्द्रजित के द्वारा मायामयी सीता का वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.81.31 
तामिन्द्रजित् स्त्रियं हत्वा हनूमन्तमुवाच ह।
मया रामस्य पश्येमां प्रियां शस्त्रनिषूदिताम्।
एषा विशस्ता वैदेही निष्फलो व: परिश्रम:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस स्त्री को मारकर इंद्रजीत ने हनुमान से कहा - 'देखो, मैंने अपनी तलवार से राम की इस प्रिय पत्नी का सिर काट डाला है। यह रही सिर कटी हुई विदेह राजकुमारी सीता। अब युद्ध के लिए तुम्हारा प्रयास व्यर्थ है।'॥31॥
 
After killing that woman Indrajit said to Hanuman - 'Look, I have beheaded this beloved wife of Ram with my sword. Here is the beheaded Videha princess Sita. Now your efforts for the war are in vain.'॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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