श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.80.8 
सर्वतोऽग्निं समास्तीर्य शरपत्रै: सतोमरै:।
छागस्य सर्वकृष्णस्य गलं जग्राह जीवत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उसने अग्नि के चारों ओर तोमर सहित शस्त्र रूपी सरकंडे फैला दिए। तत्पश्चात उसने एक जीवित काले बकरे की गर्दन पकड़कर अग्नि में आहुति दे दी।
 
He spread the reeds in the form of weapons including the tomara around the fire. After that he caught hold of the neck of a live black goat and offered it in the fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)