Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.80.39-40: महाबाहो! जो युद्ध न कर रहा हो, छिपा हो, हाथ जोड़कर शरण मांग रहा हो, युद्ध से भाग रहा हो या पागल हो गया हो, उसे तुम्हें नहीं मारना चाहिए। अब मैं उस इंद्रजीत को मारने का प्रयत्न करूँगा। आओ, हम ऐसे अस्त्रों का प्रयोग करें जो विषैले सर्पों के समान भयंकर और वेगवान हों। 39-40 | ramayan सर्ग 6.80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अयुध्यमानं प्रच्छन्नं प्राञ्जलिं शरणागतम्।
पलायमानं मत्तं वा न हन्तुं त्वमिहार्हसि॥ ३९॥
तस्यैव तु वधे यत्नं करिष्यामि महाभुज।
आदेक्ष्यावो महावेगानस्त्रानाशीविषोपमान्॥ ४०॥
अनुवाद
महाबाहो! जो युद्ध न कर रहा हो, छिपा हो, हाथ जोड़कर शरण मांग रहा हो, युद्ध से भाग रहा हो या पागल हो गया हो, उसे तुम्हें नहीं मारना चाहिए। अब मैं उस इंद्रजीत को मारने का प्रयत्न करूँगा। आओ, हम ऐसे अस्त्रों का प्रयोग करें जो विषैले सर्पों के समान भयंकर और वेगवान हों। 39-40
‘Mahabaho! You should not kill a person who is not fighting, is hiding, has folded his hands and is seeking refuge, is fleeing from the battle or has gone mad. Now I will try to kill that Indrajit. Come, let us use weapons which are as dreadful and as fast as poisonous serpents. 39-40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥