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ramayan 6.80.34: दशरथ के दोनों वीर पुत्र उसके सुवर्ण पंख वाले प्रबल बाणों से बुरी तरह घायल होकर रक्त से लथपथ पलाश वृक्षों के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   ramayan सर्ग 6.80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.80.34 
तेनातिविद्धौ तौ वीरौ रुक्मपुङ्खै: सुसंहतै:।
बभूवतुर्दाशरथी पुष्पिताविव किंशुकौ॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
दशरथ के दोनों वीर पुत्र उसके सुवर्ण पंख वाले प्रबल बाणों से बुरी तरह घायल होकर रक्त से लथपथ पलाश वृक्षों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Both the brave sons of Dasharatha, badly wounded by his strong arrows having wings of gold, looked like blooming Palaash trees, soaked in blood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)