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ramayan 6.80.30: वे कंकरों से युक्त बाण आकाश में पहुँचकर रावणकुमार इन्द्रजीत को क्षत-विक्षत कर देते और रक्त से भीगकर पृथ्वी पर गिर पड़ते ॥30॥   |   ramayan सर्ग 6.80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.80.30 
अन्तरिक्षे समासाद्य रावणिं कङ्कपत्रिण:।
निकृत्य पतगा भूमौ पेतुस्ते शोणिताप्लुता:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वे कंकरों से युक्त बाण आकाश में पहुँचकर रावणकुमार इन्द्रजीत को क्षत-विक्षत कर देते और रक्त से भीगकर पृथ्वी पर गिर पड़ते ॥30॥
 
Those arrows tipped with pebbles would reach the sky and mutilate Ravanakumar Indrajit and fall on the earth drenched in blood. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)