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ramayan 6.80.27: जहाँ दृष्टि प्रभावहीन थी, वहाँ घोर अंधकार में महाबाहु इन्द्रजित ने पत्थरों की अद्भुत वर्षा के समान नाराच नामक बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी ॥27॥   |   ramayan सर्ग 6.80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.80.27 
घनान्धकारे तिमिरे शिलावर्षमिवाद्भुतम्।
स ववर्ष महाबाहुर्नाराचशरवृष्टिभि:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जहाँ दृष्टि प्रभावहीन थी, वहाँ घोर अंधकार में महाबाहु इन्द्रजित ने पत्थरों की अद्भुत वर्षा के समान नाराच नामक बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी ॥27॥
 
In the dense darkness where vision was ineffective, the mighty-armed Indrajit started hurling arrows called Naarach like a wonderful rain of stones. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)