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ramayan 6.80.21: 'ये वे दोनों हैं' ऐसा सोचकर इंद्रजीत ने धनुष चढ़ाया और वर्षा करने वाले बादल की तरह अपने बाणों से समस्त दिशाओं को भर दिया।   |   ramayan सर्ग 6.80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.80.21 
इमौ ताविति संचिन्त्य सज्यं कृत्वा च कार्मुकम्।
संततानेषुधाराभि: पर्जन्य इव वृष्टिमान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'ये वे दोनों हैं' ऐसा सोचकर इंद्रजीत ने धनुष चढ़ाया और वर्षा करने वाले बादल की तरह अपने बाणों से समस्त दिशाओं को भर दिया।
 
Thinking that 'these are the two of them' Indrajit strung his bow and, like a rain-showering cloud, filled all directions with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)