Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.80.17: आज मैं युद्धभूमि में अपने उन दोनों भाइयों राम और लक्ष्मण को मारकर, जो व्यर्थ ही वन में आ गए हैं (या साधुओं का वेश धारण कर लिया है) अपने पिता रावण को परम विजय प्रदान करूँगा॥ 17॥   |   ramayan सर्ग 6.80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.80.17 
अद्य हत्वा रणे यौ तौ मिथ्या प्रव्रजितौ वने।
जयं पित्रे प्रदास्यामि रावणाय रणेऽधिकम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
आज मैं युद्धभूमि में अपने उन दोनों भाइयों राम और लक्ष्मण को मारकर, जो व्यर्थ ही वन में आ गए हैं (या साधुओं का वेश धारण कर लिया है) अपने पिता रावण को परम विजय प्रदान करूँगा॥ 17॥
 
Today, by killing on the battlefield both my brothers, Rama and Lakshmana, who have unnecessarily come to the forest (or have falsely assumed the garb of ascetics), I shall grant my father Ravana a supreme victory.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)