श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.80.15 
तेन चादित्यकल्पेन ब्रह्मास्त्रेण च पालित:।
स बभूव दुराधर्षो रावणि: सुमहाबल:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सूर्य के समान तेजस्वी उस रथ और ब्रह्मास्त्र से सुरक्षित होकर रावण का वह महाबली पुत्र इन्द्रजित दूसरों के लिए अजेय हो गया था।
 
Protected by that chariot as illustrious as the Sun and the Brahmastra, that mighty son of Ravana, Indrajit, had become invincible for others.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)