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ramayan 6.80.13: रथ के सभी सामान सोने के बने थे, इसलिए यह देखने में जलता हुआ प्रतीत होता था। इस पर मृग, अर्धचंद्र और पूर्णचंद्र उत्कीर्ण थे, जिससे इसकी सजावट आकर्षक लग रही थी।   |   ramayan सर्ग 6.80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.80.13 
जाज्वल्यमानो वपुषा तपनीयपरिच्छद:।
मृगैश्चन्द्रार्धचन्द्रैश्च स रथ: समलंकृत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
रथ के सभी सामान सोने के बने थे, इसलिए यह देखने में जलता हुआ प्रतीत होता था। इस पर मृग, अर्धचंद्र और पूर्णचंद्र उत्कीर्ण थे, जिससे इसकी सजावट आकर्षक लग रही थी।
 
All its accessories were made of gold, so the chariot appeared to be aflame in its appearance. Deer, half-moon and full-moon were engraved on it, which made its decoration look attractive. 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)