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ramayan 6.80.10: उस समय तपे हुए सोने के समान तेजस्वी अग्निदेव स्वयं प्रकट हुए और हविष्य ग्रहण किया। उनकी ज्वाला दक्षिणावर्त दिशा में निकल रही थी। 10॥   |   ramayan सर्ग 6.80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.80.10 
प्रदक्षिणावर्तशिखस्तप्तहाटकसंनिभ:।
हविस्तत् प्रतिजग्राह पावक: स्वयमुत्थित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस समय तपे हुए सोने के समान तेजस्वी अग्निदेव स्वयं प्रकट हुए और हविष्य ग्रहण किया। उनकी ज्वाला दक्षिणावर्त दिशा में निकल रही थी। 10॥
 
At that time, Agnidev, who was radiant like heated gold, appeared himself and accepted the future. His flame was coming out in a clockwise direction. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)