Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.8.21-22h: तब पर्वत के समान विशाल वज्रहनु नामक दैत्य क्रोधित होकर अपनी जीभ से उसका जबड़ा चाटने लगा और बोला -॥21 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  6.8.21-22h 
ततो वज्रहनुर्नाम राक्षस: पर्वतोपम:॥ २१॥
क्रुद्ध: परिलिहन् सृक्कां जिह्वया वाक्यमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
तब पर्वत के समान विशाल वज्रहनु नामक दैत्य क्रोधित होकर अपनी जीभ से उसका जबड़ा चाटने लगा और बोला -॥21 1/2॥
 
Then the demon named Vajrahanu, who was as huge as a mountain, became enraged and licked his jaw with his tongue and said -॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)