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ramayan 6.8.2: ‘महाराज! हम देवता, दानव, गन्धर्व, भूत, पक्षी और नागों को तो परास्त कर सकते हैं; फिर उन दो पुरुषों को युद्धभूमि में परास्त करने में क्या बड़ी बात है?॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 6.8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.8.2 
देवदानवगन्धर्वा: पिशाचपतगोरगा:।
सर्वे धर्षयितुं शक्या: किं पुनर्मानवौ रणे॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘महाराज! हम देवता, दानव, गन्धर्व, भूत, पक्षी और नागों को तो परास्त कर सकते हैं; फिर उन दो पुरुषों को युद्धभूमि में परास्त करने में क्या बड़ी बात है?॥ 2॥
 
‘Maharaj! We can defeat all the gods, demons, Gandharvas, ghosts, birds and snakes; then what is the big deal in defeating those two men on the battlefield?॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)