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ramayan 6.8.12: हे राजन! यदि आप चाहें तो मेरी दूसरी बात भी सुन सकते हैं। कुशल युक्ति वाला मनुष्य ही, यदि आलस्य त्यागकर पुरुषार्थ करे, तो अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकता है॥12॥   |   ramayan सर्ग 6.8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.8.12 
इदं ममापरं वाक्यं शृणु राजन् यदिच्छसि।
उपायकुशलो ह्येव जयेच्छत्रूनतन्द्रित:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यदि आप चाहें तो मेरी दूसरी बात भी सुन सकते हैं। कुशल युक्ति वाला मनुष्य ही, यदि आलस्य त्यागकर पुरुषार्थ करे, तो अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकता है॥12॥
 
‘O King! If you wish, you may listen to my second point. Only a man with skillful methods, if he leaves aside his laziness and makes efforts, can achieve victory over his enemies.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)