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ramayan 6.8.10: जब हमारे पास महाबली राम, सुग्रीव और लक्ष्मण हैं, तो बेचारे तपस्वी हनुमान की हमें क्या आवश्यकता है?॥10॥   |   ramayan सर्ग 6.8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.8.10 
किं नो हनूमता कार्यं कृपणेन तपस्विना।
रामे तिष्ठति दुर्धर्षे सुग्रीवेऽपि सलक्ष्मणे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब हमारे पास महाबली राम, सुग्रीव और लक्ष्मण हैं, तो बेचारे तपस्वी हनुमान की हमें क्या आवश्यकता है?॥10॥
 
What do we need the poor ascetic Hanuman for, when we have the formidable warriors Rama, Sugreeva and Lakshmana?॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)