श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 79: श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा मकराक्ष का वध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.79.35 
स भिन्नो नैकधा शूलो दिव्यहाटकमण्डित:।
व्यशीर्यत महोल्केव रामबाणार्दितो भुवि॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
दिव्य स्वर्ण से विभूषित वह भाला श्री राम के बाणों से अनेक टुकड़ों में बिखर गया और विशाल उल्का के समान भूमि पर बिखर गया।
 
That spear adorned with divine gold was shattered by Sri Rama's arrows into many pieces and scattered on the ground like a huge meteor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)