श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 79: श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा मकराक्ष का वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.79.31 
तत्तिष्ठद् वसुधां रक्ष: शूलं जग्राह पाणिना।
त्रासनं सर्वभूतानां युगान्ताग्निसमप्रभम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस राक्षस ने पृथ्वी पर खड़े होकर हाथ में वह शूल ले लिया, जो प्रलयकाल की अग्नि के समान तेजस्वी और समस्त प्राणियों को भयभीत करने वाला था ॥31॥
 
That demon standing on the earth took the spike in his hand, which was as bright as the fire of the doomsday and was terrifying to all living beings. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)