श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 79: श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा मकराक्ष का वध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.79.26 
विद्धमन्योन्यगात्रेषु द्विगुणं वर्धते बलम्।
कृतप्रतिकृतान्योन्यं कुरुतां तौ रणाजिरे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
दोनों के शरीर बाणों से छिदे हुए थे; फिर भी उनका बल दुगुना बढ़ता जा रहा था। दोनों एक-दूसरे के अस्त्र-शस्त्र काटते हुए युद्धभूमि में लड़ रहे थे।
 
Both their bodies were pierced with arrows; yet their strength was increasing by two times. Both of them were fighting on the battlefield, cutting each other's weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)