श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 79: श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा मकराक्ष का वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.79.13 
दिष्टॺासि दर्शनं राम मम त्वं प्राप्तवानिह।
कांक्षितोऽसि क्षुधार्तस्य सिंहस्येवेतरो मृग:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु राम! यह सौभाग्य की बात है कि आज तुम मेरी आँखों के सामने प्रकट हुए हो। जैसे भूखा सिंह अन्य वन-पशुओं को चाहता है, वैसे ही मैं भी तुम्हें पाने की इच्छा रखता था॥13॥
 
But Rama! It is a matter of good fortune that you have appeared before my eyes today. Just as a hungry lion desires other forest animals, I too desired to have you.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)