श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 79: श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा मकराक्ष का वध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.79.12 
दह्यन्ते भृशमङ्गानि दुरात्मन् मम राघव।
यन्मयासि न दृष्टस्त्वं तस्मिन् काले महावने॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे दुष्टात्मा राघव! उस समय विशाल दण्डकारण्य में मैंने आपको नहीं देखा था, जिससे मेरे शरीर के अंग अत्यंत क्रोध से जल रहे थे॥12॥
 
O evil-spirited Raghava! At that time I did not see you in the vast Dandakaranya, due to which my body parts were burning with extreme anger. ॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)