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ramayan 6.78.17: उस समय सारथि के हाथ से चाबुक छूटकर नीचे गिर पड़ा और संयोगवश उस राक्षस का ध्वज भी सहसा भूमि पर गिर पड़ा ॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.78: रावण की आज्ञा से मकराक्ष का युद्ध के लिये पत्र थान   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 78: रावण की आज्ञा से मकराक्ष का युद्ध के लिये पत्र थान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.78.17 
प्रभ्रष्टोऽथ करात् तस्य प्रतोद: सारथेस्तदा।
पपात सहसा दैवाद् ध्वजस्तस्य तु रक्षस:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस समय सारथि के हाथ से चाबुक छूटकर नीचे गिर पड़ा और संयोगवश उस राक्षस का ध्वज भी सहसा भूमि पर गिर पड़ा ॥17॥
 
At that time the whip slipped from the charioteer's hand and fell down, and by chance the flag of that demon also suddenly fell to the ground. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)