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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 77: हनुमान् के द्वारा निकुम्भ का वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.77.15 
तमुद्यम्य महातेजा निकुम्भोरसि वीर्यवान्।
अभिचिक्षेप वेगेन वेगवान् वायुविक्रम:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह अत्यंत तेजस्वी, पराक्रमी, वेगवान, वायु के समान बलवान और पराक्रमी था। उसने अपनी मुट्ठी उठाई और निकुंभ की छाती पर बड़े जोर से प्रहार किया।
 
He was extremely radiant, valiant, swift and had the strength and valour of the wind. He raised his fist and struck Nikumbha's chest with great force.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)