स तत्राभिहतस्तेन सुग्रीवो वानरर्षभ:।
मुष्टिं संवर्तयामास वज्रकल्पं महाबल:॥ ८९॥
अर्चि:सहस्रविकचरविमण्डलवर्चसम्।
स मुष्टिं पातयामास कुम्भस्योरसि वीर्यवान्॥ ९०॥
अनुवाद
कुम्भ के इस प्रकार आहत होकर महापराक्रमी वानरराज सुग्रीव ने भी अपने वज्र के समान मुक्का उठाकर कुम्भ की छाती पर जोर से प्रहार किया। उस मुक्के का तेज सहस्त्र किरणों से प्रकाशित सूर्य के समान चमक रहा था।
Being thus hurt by Kumbha, the mighty and most valiant monkey king Sugreeva also held his thunderbolt-like fist and struck Kumbha forcefully on the chest. The brilliance of that punch was radiating like the sun illuminated by thousands of rays. 89-90.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)