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ramayan 6.76.80: सुग्रीव के इस अपमानजनक वचन से सम्मानित कुम्भ की महिमा घी की आहुति ग्रहण करने वाले अग्निदेव के समान बढ़ गई ॥8॥   |   ramayan सर्ग 6.76: अङ्गद के द्वारा कम्पन और प्रजङ्घका द्विविद के द्वारा शोणिताक्षका, मैन्द के द्वारा यूपाक्षका और सुग्रीव के द्वारा कुम्भ का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 76: अङ्गद के द्वारा कम्पन और प्रजङ्घका द्विविद के द्वारा शोणिताक्षका, मैन्द के द्वारा यूपाक्षका और सुग्रीव के द्वारा कुम्भ का वध  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  6.76.80 
तेन सुग्रीववाक्येन सावमानेन मानित:।
अग्नेराज्यहुतस्येव तेजस्तस्याभ्यवर्धत॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के इस अपमानजनक वचन से सम्मानित कुम्भ की महिमा घी की आहुति ग्रहण करने वाले अग्निदेव के समान बढ़ गई ॥8॥
 
Kumbha, honored by this insulting word of Sugriva, increased in glory like the fire god who has received the offering of ghee. 8 0॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)