श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 76: अङ्गद के द्वारा कम्पन और प्रजङ्घका द्विविद के द्वारा शोणिताक्षका, मैन्द के द्वारा यूपाक्षका और सुग्रीव के द्वारा कुम्भ का वध  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  6.76.6-7 
क्षुरक्षुरप्रनाराचैर्वत्सदन्तै: शिलीमुखै:।
कर्णिशल्यविपाठैश्च बहुभिर्निशितै: शरै:॥ ६॥
अङ्गद: प्रतिविद्धाङ्गो वालिपुत्र: प्रतापवान्।
धनुरुग्रं रथं बाणान् ममर्द तरसा बली॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जब वालि के प्रतापी पुत्र अंगद के सभी अंग उसके द्वारा छोड़े गए क्षुर 1, क्षुरप्र 2, नाराच 3, वत्सदन्त 4, शिलिमुख 5, कर्णी 6, शल्य 7 और विपथ 8 नामक असंख्य तीखे बाणों से बिंध गए, तब उन महारथियों ने बड़े वेग से उस राक्षस के भयंकर धनुष, रथ और बाणों को चूर-चूर कर दिया॥
 
When all the limbs of the glorious son of Vali, Angada, were pierced by the innumerable sharp arrows shot by him, named Kshur 1, Kshurpra 2, Narach 3, Vatsadant 4, Shilimukh 5, Karni 6, Shaly 7 and Vipath 8, then those mighty warriors with great speed crushed the fierce bow, chariot and arrows of that demon. 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)