श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 76: अङ्गद के द्वारा कम्पन और प्रजङ्घका द्विविद के द्वारा शोणिताक्षका, मैन्द के द्वारा यूपाक्षका और सुग्रीव के द्वारा कुम्भ का वध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.76.44 
तां शिलां तु प्रचिक्षेप राक्षसाय महाबल:।
बिभेद तां शिलां कुम्भ: प्रसन्नै: पञ्चभि: शरै:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उस महाबली योद्धा ने उस चट्टान को राक्षस पर फेंका; किन्तु कुम्भ ने पांच चमकते बाणों से उसे टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
That mighty warrior threw that rock at the demon; but Kumbha broke it into pieces with five shining arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)