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श्लोक  6.76.42 
सहसाभिहतस्तेन विप्रमुक्तपद: स्फुरन्।
निपपात त्रिकूटाभो विह्वलन् प्लवगोत्तम:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
अचानक उसके बाण से घायल होकर त्रिकूट पर्वत के समान विशाल, वानरश्रेष्ठ द्विविद व्याकुल होकर भूमि पर गिर पड़ा, और पीड़ा से छटपटाने लगा।
 
Suddenly struck by his arrow, Dwivid, the greatest of monkeys, as huge as the Trikuta mountain, became distraught and fell down on the ground, stretching his legs and writhing in pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)