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ramayan 6.75.59-60h: राक्षसों की विशाल सेना भी बड़े वेग से उछलकर शत्रु सेना की ओर बढ़ी, जैसे पतंगे आग पर गिरते हैं।   |   ramayan सर्ग 6.75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  6.75.59-60h 
जवेनाप्लुत्य च पुनस्तद् बलं रक्षसां महत्॥ ५९॥
अभ्ययात् प्रत्यरिबलं पतंगा इव पावकम्।
 
 
अनुवाद
राक्षसों की विशाल सेना भी बड़े वेग से उछलकर शत्रु सेना की ओर बढ़ी, जैसे पतंगे आग पर गिरते हैं।
 
The huge army of demons also jumped with great speed and advanced towards the enemy army, just like kites fall on a fire. 59 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)