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ramayan 6.75.41: वह रात्रि उन राक्षस राजाओं के लिए कालरात्रि की रात्रि के समान सिद्ध हुई, जो कमर बाँधकर, कवच आदि धारण करके, सिंहों के समान गर्जना करते हुए युद्ध के लिए तैयार हो रहे थे।   |   ramayan सर्ग 6.75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.75.41 
तेषां संनह्यमानानां सिंहनादं च कुर्वताम्।
शर्वरी राक्षसेन्द्राणां रौद्रीव समपद्यत॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
वह रात्रि उन राक्षस राजाओं के लिए कालरात्रि की रात्रि के समान सिद्ध हुई, जो कमर बाँधकर, कवच आदि धारण करके, सिंहों के समान गर्जना करते हुए युद्ध के लिए तैयार हो रहे थे।
 
That night turned out to be like the night of Kalaratri for those Rakshasa kings who, girding their loins and putting on armour etc., were getting ready for battle and roaring like lions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)